सिमट जाने दो आज
कागज़ पर लफजो़ की हर सिलवट को
क्या खबर कितनी बेचैंनियां दबी हैं नादांने दिल में
गुफतगू करते वो खामोश दिल
धडकन के संमुंदर में बहते
करें इतंज़ार कशती का
उफनती लहरों की तनहांइयां
मोन शोर को समेट
बिखेरें मुस्कराहटें चटा्नों पर।
-०४/०४/२०१८-
©Copyright Deeप्ती
कागज़ पर लफजो़ की हर सिलवट को
क्या खबर कितनी बेचैंनियां दबी हैं नादांने दिल में
गुफतगू करते वो खामोश दिल
धडकन के संमुंदर में बहते
करें इतंज़ार कशती का
उफनती लहरों की तनहांइयां
मोन शोर को समेट
बिखेरें मुस्कराहटें चटा्नों पर।
-०४/०४/२०१८-
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