Kindly Listen the Audio Version of this .
हसरतों की इंतहां थी, राज़-ऐ-दिल खोल आऊं
सोचती थी दोस्त कोई, साथ हो तो बोल आऊं
वो हसीं सी शाम थी, राह में मिले यूँ
बदहवासी में ढली, कहने लगी ये मोल आऊं
जल रही थी जो ज़मीन, वो बादलों से हो चली तर
कह उठा दिल यूँ न करना ये, की रिश्ता तोल आऊं
उस घटा को इस ज़मीन पे, मैं उतारूँ ये तम्मन्ना
तुम मिले तो सोचा, उस खुदा को बोल आऊं
मैं पड़ी थी मर गयी सी ,न खबर थी रात तक ये
दिन चढ़ा तो मौज आया, बात ये भी खोल आऊं
भीड़ में थे हम अकेले, ये न जाना सामने था
हमसफ़र इक साथ जिसके, सच भरे पल डोल आऊं
साथ रहकर भी अकेले, तुम हमेशा क्यों रहे हो
दो ज़हर अपना मुझे उसको कहीं घोल आऊं
©Copyright Deeप्ती
हसरतों की इंतहां थी, राज़-ऐ-दिल खोल आऊं
सोचती थी दोस्त कोई, साथ हो तो बोल आऊं
वो हसीं सी शाम थी, राह में मिले यूँ
बदहवासी में ढली, कहने लगी ये मोल आऊं
जल रही थी जो ज़मीन, वो बादलों से हो चली तर
कह उठा दिल यूँ न करना ये, की रिश्ता तोल आऊं
उस घटा को इस ज़मीन पे, मैं उतारूँ ये तम्मन्ना
तुम मिले तो सोचा, उस खुदा को बोल आऊं
मैं पड़ी थी मर गयी सी ,न खबर थी रात तक ये
दिन चढ़ा तो मौज आया, बात ये भी खोल आऊं
भीड़ में थे हम अकेले, ये न जाना सामने था
हमसफ़र इक साथ जिसके, सच भरे पल डोल आऊं
साथ रहकर भी अकेले, तुम हमेशा क्यों रहे हो
दो ज़हर अपना मुझे उसको कहीं घोल आऊं
©Copyright Deeप्ती
No comments:
Post a Comment