उस फूल से चुरा के खुशबू
गुलाब से ले लिया रंग उधार
पत्तों पर ठहरी ओस की बूंद
रंगों को कर अंखियों में बंद
सारी....कीमती यादों को बांध गठरी में
सहेजा मन मंदिर में
बच्चों की खिलखिलाहट
बड़ों का आशीर्वाद
पति का प्यार
सभी समेट लिया आगोश में
सहेजा....सारे सपनों को
मन के बक्से में
जा कर दिल के तहखाने में
टटोल लेते है इन्हीं यादों को
जब भी मन उदास हो
खोल बक्सों को
जी लेते हैं....
वहीं सुखद पल फिर से
©Deeप्ती
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