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Thursday, February 4, 2021

दोनों दुनियां





अनुज घर से बुझे मन से निकला। स्कूटर स्टार्ट करने के लिए किक मारा लेकिन वो निर्मोही भी स्टार्ट ना हुआ। थोड़ी देर उसपर अपना गुस्सा निकालते , खीजते हुए दो चार किक और मारे तो घिघियाता हुए सा काला धुआं छोड़ वो आखिर चलती सांसे लेने ही लगा। स्टैंड से उतार उस पर बैठ आगे बढ़ा ही था कि एक ईंट पहिए के नीचे आ गई और स्कूटर डगमगा गया।

ठीक उसकी ज़िन्दगी की तरह। लेकिन उसकी ज़िन्दगी में ईंट नहीं आयी बल्कि पूरी की पूरी ज़िन्दगी ही आ गई हो जैसे।

कितना खुश था वो उस दिन जब घर वालों ने उसके लिए एक सभ्य घर की लड़की को पसंद करा था। महिमा, देखने में बिल्कुल साधारण थी, और कोई खास शिक्षा भी नहीं प्राप्त करी थी। बस बड़ी मुश्किल से बात पक्की हो पाई थी।

दूसरी ओर अनुज भी सीधा साधा सा था, एक छोटी सी दुकान थी आर्टिफिशियल ज्वेलरी की पुराने शहर में। पिता उसके जनम से पहले ही दूसरी दुनिया में जा चुके थे। एक छोटी बहन थी जिसकी जिम्मेदारी भी उसी के कंधो पर थी।  माँ ने जैसे तैसे, छोटे मोटे काम कर बड़े जतन से अपने बच्चों को पाला था।

तीस वर्ष का हो चला था, बहन की शादी एक अच्छे घर में कर दी थी। अब मां का मन था कि अनुज का घर भी बस जाए। घर की हालत कुछ खास अच्छी नहीं थी सो कोई लड़की भी नहीं मिल रही थी। अब जा कर बात महिमा से पक्की हुई थी।

शादी खूब धूम धाम से करी गई। बड़े ही नाज़ से मां ने बहू का स्वागत करा। लेकिन यह क्या, महिमा ने आते ही सास से कहा कि उसे नए कंगन चाहिए। अनुज से पहली ही रात बोली "अपनी हद में रहना, नहीं तो तेरी  मां के हाथ पैर तोड़ दूंगी। सुबह मेरे से उम्मीद नहीं करना की चाय बनाऊं। जल्दी भी नहीं उठ सकती में। जब उठूं तब मुझे चाय देना और खाना भी खुद ही बनाना। मेरे नाज़ुक हाथ खराब हो जाएंगे इसलिए बर्तन कपड़े तो बिल्कुल नहीं धो सकती।"

अनुज अवाक रह गया। एक ही पल में सब सपने तार तार हो गए। बस वो दिन था और आज का दिन, चकरघन्नी की तरह महिमा के पीछे दौता रहता है। लेकिन ना जाने उसे क्या चाहिए वो किसी भी तरह खुश नहीं होती है। बात बात पर मां को गंदी भद्धी गालियां देती, वो कुछ कहता तो लात घूंसे उसे ही जड़ देती। फिर धमकी देती "थाने में बंद करवा दूंगी। दहेज मांगते हो कह कर जेल भिजवा दूंगी। में लड़की हूं , मेरी बात पर सब को यकीन होगा" उसके मां बाप भी अपनी बेटी का साथ दे कई बार अनुज को गुंडों से पिटवा भी चुके थे। वो कहते घर, और ज़ेवर उनकी बेटी के नाम का दो नहीं तो ज़िन्दगी दूभर कर देंगे।

उधर मां, अनुज को शांत करती की रहने दे। "जो चाहे उसे बोल लेने दे। तू भी उ से डांटेगा या फटकरेगा तो तेरी शिक्षा क्या कहेगी" वो मन मार कर अपमान का घूंट पी कर रह जाता। किस से अपने दिल की बात कहे समझ ही नहीं पाता। दुनिया तो उसे ही कहेगी की मर्द है संभाले बीवी को। लेकिन कैसे? वो हाथ उठाए तो कैसा ज़ुल्मी मर्द। सब सह जाए तो डरपोक। कैसी दुविधा है। कहां जाए। क्या करे किस से कहे कुछ समझ नहीं पाता।

पहिए के नीचे आती ईंट की तरह बस तिलमिला कर रहा जाता। सुबह मिश्री सी मीठी गालियों का बक्सा संजोए घर से निकला था जब वो ईंट की वजह से गिरते गिरते बचा। आगे लाल बत्ती , हरी हुई तो वो चला ही था कि अचानक, लाल बत्ती तोड़ती, सामने से तेज़ आती कार ने उसके स्कूटर को टक्कर मार हवा में उछाल दिया।

वो इतना तेज़ झटका था कि वो उस हवा में उछाल कर हवा ही बना गया। उड़ता हुआ पहुंच गया सतरंगी दुनिया में। यह कौन जगह है? कानो में मीठी शहनाई सी बजने लगी। चारों ओर सुरीला संगीत व मनमोहक खुशबू फैली थी। रंग बिरंगे फूलों से हर कोना सजा था। उसकी नजर क़दमों पर गई तो यह क्या वो तो बादलों पर खड़ा था। नीचे बहुत नीचे उसका बेजान शहीर खून से लथपथ पड़ा था। भीड़ ने चारो और से घेरा हुआ था।

लेकिन वो अब जहां खड़ा था वो इतना सुन्दर व सुकून भरा था जिसकी उसने कल्पना भी नहीं करी थी। इतने वर्षों बाद आज उसे शान्ती मिली थी।

🙏ॐ शान्ती🙏