Sometimes bright or dull colours captures my mind arena and pick up the brush to paint abstract picture of words on the canvass of the sky.
Monday, January 28, 2019
Sunday, January 27, 2019
Wednesday, January 16, 2019
में
कुछ धुंदली सी यादों के बीच
सिमटा हूँ में
आईना साफ़ करूँ या नज़रिया
यही सोचता हूँ में
चेहरे पे मुखौटे तो बहुत हैं
परत दर परत उतारता हूँ में
जिस्म से रूह तक का ये सफर
समझ लेता हूँ में
आईने में खुद को देख
कुछ सोच लेता हूँ में
दूर क्षितिज पे फैला है उजाला
वही परखने चला हूँ में।
~ १५/०१/२०१९~
©Copyright Deeप्ती
Friday, December 28, 2018
वक़्त का पिटारा
गुज़रे वक़्त का पिटारा खोला है
बेतरतीब पड़े लम्हो को
समेटने का विचार किया है
यादों की तह के बीच से
कुछ चमकते सिक्कों से सपने मिले हैं
बाँहें पसार मुझे आगोश में लेने को बेचैन हैं
वहीँ कोने में पड़ा यादों का उलझा गोला मिला है
हाथ से उठा उसीसे ठिठुरती
ज़िन्दगी का हिसाब लिया है
कुछ कड़वी बातों की गठरी भी सहेजे हुए थी
आज बाहर निकाल फेंकने का
इरादा बुलंद करा है
नीचे दबे ख़याली उम्मीदों के खाली डब्बे भी जगह घेर रहे हैं
क्या काम उनका यहाँ
चलो उन्हें भी बाहर फ़ेंक दिया जाये
गुड़ मुड़ पीले पन्नों सी मुस्कराहट दुबकी बैठी थी
चमकती धुप दिखा कर
आज उसे फिर ओढ़ लिया है
वक़्त का पिटारा आज फिर खोल लिया है
साफ़ सुथरा कर
नए रंगों को रास्ता दिया है
©Copyright Deeप्ती
बेतरतीब पड़े लम्हो को
समेटने का विचार किया है
यादों की तह के बीच से
कुछ चमकते सिक्कों से सपने मिले हैं
बाँहें पसार मुझे आगोश में लेने को बेचैन हैं
वहीँ कोने में पड़ा यादों का उलझा गोला मिला है
हाथ से उठा उसीसे ठिठुरती
ज़िन्दगी का हिसाब लिया है
कुछ कड़वी बातों की गठरी भी सहेजे हुए थी
आज बाहर निकाल फेंकने का
इरादा बुलंद करा है
नीचे दबे ख़याली उम्मीदों के खाली डब्बे भी जगह घेर रहे हैं
क्या काम उनका यहाँ
चलो उन्हें भी बाहर फ़ेंक दिया जाये
गुड़ मुड़ पीले पन्नों सी मुस्कराहट दुबकी बैठी थी
चमकती धुप दिखा कर
आज उसे फिर ओढ़ लिया है
वक़्त का पिटारा आज फिर खोल लिया है
साफ़ सुथरा कर
नए रंगों को रास्ता दिया है
©Copyright Deeप्ती
Thursday, October 11, 2018
हमारी बला से

मूर्ति की पूजा हम खूब करेंगे
हार चढ़ी तस्वीर भी पूजनीय है
अरे किसके पास वक़्त है
हाड मांस के लिए वो जिए या मरे
हमारी बला से
उस दुर्गा माँ को तो हम पूजेंगे
वही किसी कोने में खेलती मासूम ज़िन्दगी
को तो हम नोच खाएंगे
फिर चाहे वो घर की कली हो या बाहर की
हमारी बला से
वो दुर्गा मूर्ति वाली माँ तो बस मुस्कराती रहती है
वो क्या बिगाड़ लेगी हमारा
हम चाहे जितने चीर हरण करें
कौन कृष्ण बचाने आएंगे
हमारी बला से
Friday, August 31, 2018
गधा सिंह का बाप हो गया
देखो गधा कर रहा सिंह की सवारी
नया ज़माना आ गया
सिंह को नोच गधा खा गया
घास मुंह में दबाये
बोटी बोटी चबा गया
देखो गधा सिंह पे हावी हो गया
वाह वाह कर रही दुनिया
सिंह बेचारा बीमार हो गया
गधा सर पे नाच उसके
खीसे निपोर छल रहा जमके
आज गधा सिंह का बाप हो गया
नज़र झुका सुस्त कदम से
नाप रहा जंगल को
छुप छुप के गधे से
साध रहा जीवन को
बदल रास्ता मायूस हो गया
देखो देखो वो गधा
कर रहा सिंह की सवारी
बेख़ौफ़ उस पर हावी हो
आज उसी का बाप हो गया
देखो गधा सिंह का बाप हो गया....
.... सिंह का बाप हो गया।
~ ३१/०८/२०१८~
©Copyright Deeप्ती
नया ज़माना आ गया
सिंह को नोच गधा खा गया
घास मुंह में दबाये
बोटी बोटी चबा गया
देखो गधा सिंह पे हावी हो गया
वाह वाह कर रही दुनिया
सिंह बेचारा बीमार हो गया
गधा सर पे नाच उसके
खीसे निपोर छल रहा जमके
आज गधा सिंह का बाप हो गया
नज़र झुका सुस्त कदम से
नाप रहा जंगल को
छुप छुप के गधे से
साध रहा जीवन को
बदल रास्ता मायूस हो गया
देखो देखो वो गधा
कर रहा सिंह की सवारी
बेख़ौफ़ उस पर हावी हो
आज उसी का बाप हो गया
देखो गधा सिंह का बाप हो गया....
.... सिंह का बाप हो गया।
©Copyright Deeप्ती
Wednesday, April 11, 2018
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