Monday, January 28, 2019

हिन्दुस्तान



क्या हिन्दू क्या मुसलमान
ये देश हमारा है मेरी जान
कुछ सौदागरों की राजनीति में
क्या भूल जाएँ अपना ईमान
माटी से मोह्हबत की
जलती आग है हर सीने में
क्या मेरा क्या तेरा
हर दिल में है बस्ता
हिन्दुस्तान

~ २६/०१/२०१९~

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Sunday, January 27, 2019

उडान



ऐ दिल ज़रा सीख
पंख अपने खोलना
अभी तो पहला टुकडा
दिखा है आसमान का
पूरा गगन करे हेे इंतज़ार
हमारी उँची उडान का


~27/02/2019~

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Wednesday, January 16, 2019

में



कुछ धुंदली सी यादों के बीच
सिमटा हूँ में
आईना  साफ़ करूँ या नज़रिया
यही सोचता हूँ में
चेहरे पे मुखौटे तो बहुत हैं
परत दर परत उतारता हूँ में


जिस्म से रूह तक का ये सफर
समझ लेता हूँ में
आईने में खुद को देख
कुछ सोच लेता हूँ में
दूर क्षितिज पे फैला है उजाला
वही परखने चला हूँ में।

~ १५/०१/२०१९~

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Friday, December 28, 2018

वक़्त का पिटारा

गुज़रे वक़्त का पिटारा खोला है
बेतरतीब पड़े लम्हो को
समेटने का विचार किया है

यादों की तह के बीच से
कुछ चमकते सिक्कों से सपने मिले हैं
बाँहें पसार मुझे आगोश में लेने को बेचैन हैं

वहीँ कोने में पड़ा यादों का उलझा गोला मिला है
हाथ से उठा उसीसे ठिठुरती
ज़िन्दगी का हिसाब लिया है

कुछ कड़वी बातों की गठरी भी सहेजे  हुए थी
आज  बाहर निकाल फेंकने का
इरादा बुलंद करा है

नीचे दबे ख़याली उम्मीदों के खाली डब्बे भी जगह घेर रहे हैं
क्या  काम उनका यहाँ
चलो उन्हें भी बाहर फ़ेंक दिया जाये

गुड़ मुड़ पीले पन्नों सी मुस्कराहट दुबकी बैठी थी
चमकती धुप दिखा कर
आज उसे फिर ओढ़ लिया है

वक़्त का पिटारा आज फिर खोल लिया है
साफ़ सुथरा कर
नए रंगों को रास्ता दिया है




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Thursday, October 11, 2018

हमारी बला से

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मूर्ति की पूजा हम खूब करेंगे
हार चढ़ी तस्वीर भी पूजनीय है
अरे किसके पास वक़्त है
हाड मांस के लिए वो जिए या मरे
हमारी बला से

उस दुर्गा माँ को तो हम पूजेंगे
वही किसी कोने में खेलती मासूम ज़िन्दगी
को तो हम नोच खाएंगे
फिर चाहे वो घर की कली हो या बाहर की
हमारी बला से

वो दुर्गा मूर्ति वाली माँ तो बस मुस्कराती रहती है
वो क्या बिगाड़ लेगी हमारा
हम चाहे जितने चीर हरण करें
कौन कृष्ण बचाने आएंगे
हमारी बला से

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Friday, August 31, 2018

गधा सिंह का बाप हो गया

देखो गधा कर रहा सिंह की सवारी

नया ज़माना आ गया
सिंह को नोच गधा खा गया
घास मुंह में दबाये
बोटी बोटी चबा गया

देखो गधा सिंह पे हावी हो गया

वाह वाह कर रही दुनिया
सिंह बेचारा बीमार हो गया
गधा सर पे नाच उसके
खीसे निपोर छल रहा जमके

आज गधा सिंह का बाप हो गया 

नज़र झुका सुस्त कदम से 
नाप रहा जंगल को 
छुप छुप के गधे से 
साध रहा जीवन को 

बदल रास्ता मायूस हो गया 

देखो देखो वो गधा 
कर रहा सिंह की सवारी 
बेख़ौफ़ उस पर हावी हो 
आज उसी का बाप हो गया 

देखो गधा सिंह का बाप हो गया....  
.... सिंह का बाप हो गया। 

~ ३१/०८/२०१८~ 

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