"वर्तमान परिस्थिति में जो तुम्हारा कर्तव्य है, वही तुम्हारा धर्म है।"
कृष्ण सबके चहेते नटखट बाल गोपाल सबके मन को बहुत भाते हैं। उनकी अनेकों बाल लीलाएं हमारे मन में छाप छोड़ जाती हैं। उनके जन्म से ले कर उनकी परम धाम की यात्रा तक सैकड़ों कहानियां सुनी और सुनाई जाती हैं। आज उन्ही की बाल कहानियों में से एक कहानी ले कर आयी हूँ।
गोकुल बहुत ही समृद्ध और खुशहाल गाँव था। माखन चोर नन्द लाल जो वहां रहते थे। उनकी एक मुस्कराहट पर सब निहाल हो जाते थे। गांववासी के साथ साथ वहां के पशु-पक्षी , पेड़ , नदी , पहाड़ सब झूम जाते थे।
"आयो जी नटखट नंदलाला
गोविंदा ब्रज का बाला "
वही पर यमुना नदी से जुड़ी हुई एक मीठे पानी की सुंदर झील थी। जिस के पानी से सब अपनी प्यास भुझाते थे। एक दिन ना जाने कहाँ से एक कालिया नाम का बहुत ही जहरीला सांप अपनी पत्नी के साथ वहां आकर रहने लगा। कालिया का जहर यमुना नदी के पानी में बहुत तेजी से घुलने लगा और पानी जहरीला होने लगा था।
एक दिन की बात है, एक गाय चराने वाला वहां आया और जब उसने झील का पानी पिया तो पीते ही वो मुर्षित हो गया और उसकी मृत्यु हो गई।
पास ही के कुछ चरवाहों ने ये खबर नन्द महाराज को जा कर दी। वही खेल रहे गोविन्द ने जैसे ही सारा वृतांत सुना फ़ौरन नदी तट पर पहुँच गए और अपने प्रताप से उस व्यक्ति को जीवित कर दिया।
तत्पच्ताप, श्री कृष्ण उस झील में कूद गए। वे पानी के बहुत अंदर तक पहुँच गए गए और उस सांप को जोर-जोर से पुकारने लगे "क्यों निर्दोष लोगो की जान ले रहे हो कालिया। बाहर निकलो और मेरे साथ युद्ध करो "
उधर बाहर जब बहुत देर तक कृष्ण पानी से नहीं निकले तो गांव के लोग इकट्ठा होकर नदी किनारे उनका इंतजार करने लगे। माता यसोधा का तो रो रो कर बुरा हाल हो गया था। वे यही सोच कर चिंतित थी की ना जाने इतने विषैले सर्प से कैसे बचेगा उनका लाल।
पानी के अंदर, कालिया सांप कृष्ण के सामने आया और उनपर आक्रमण कर दिया। विशालकाय सर्प ने उन्हें जकड लिया था। लेकिन कुछ ही देर बाद कृष्ण ने कालिया को जकड़ लिया और उसके सर पर चढ़ गए। कालिया के हजार सिर थे। कृष्ण उसके सर हो सवार हो तेजी से नाचने लगे। उनके नाचने के कारण कालिया का मुख खून से लथपथ हो गया। यह देखकर कालिया की पत्नी वहां आई और अपने पति के जीवन की भीख मांगने लगी।
नरमदिल कृष्ण ने उसकी प्रार्थना स्वीकार कर ली और उन दोनों से यमुना नदी की झील छोड़ कर जाने को कहा।
"में जानता हूँ की तुम्हारी रचना एक विषैले जीव के रूप में हुई है। इसमें तुम्हारा कोई दोष नहीं। लेकिन अनजाने में तुम्हारा ये विष मेरे गांव वासियों को मृत्यु के नज़दीक ले जा रहा है। इसलिए मेरा निवेदन है की आप यहाँ से रामानका द्वीप चले जाएँ ।"
इतना ही नहीं, कृष्ण ने कालिया को आश्वासन भी दिया कि अब उन पर गरुड़ कभी भी आक्रमण नहीं करेगा क्योंकि उनके नाचने की वजह से, कालिया के सिर पर उनके पैरों के निशान बन गए थे।
यह सुनकर कालिया बहुत ही खुश हुआ। कालिया और उसकी पत्नी ने प्रभु को नमन करा और यमुना नदी की उस सुंदर झील को छोड़कर चले गया।
पूरा गाँव हर्षो उलाहस से भर गया क्यूंकि कृष्ण ने उन सब की कालिया सांप से रक्षा करी थी।
"मान, अपमान, लाभ-हानि खुश हो जाना या दुखी हो जाना यह सब मन की शरारत है ।"
बोलो बांके बिहारी की जय !
~ १४/०८/२०१९ ~
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