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लम्हे तो लम्हे है हर पल
गुज़रते जाते हैं
सूखी रेत से फिसलते जाते हैं
कुछ सीख लिया तो अच्छा
नहीं सीखा तो भी अच्छा
मुस्कराते रहो
गुनगुनाते रहो
लम्हो का यही फ़साना है।
क्या सोचे क्या हुआ
क्या समझे क्यों हुआ
पीछे मुड़ कर देखे क्यों
आगे नए सपने खड़े
कुछ नए लम्हों
में जकड़े हुए
आओ हाथ बढ़ा के
थाम ले झोली भर-भर कर।
आओ कुछ नए लम्हे गढ़ें
कुछ नयी यादे बनाएं
थोड़ा थोड़ा जी लें
थोड़ा थोड़ा रम लें
नादाँ लम्हों से
कुछ और सीख लें
ये ही तो हैं बस हमारे
अपने आप को खोज लें।
~ ०४/११/२०१९~
©Copyright Deeप्ती
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