Monday, May 8, 2017

बिन तेरे

बिन तेरे फीकी लागे
चाय की चुसकीयां
बदरगं लागे 
फूलों की कलियां

झूले के सूखे झोंके
केश उडाऐं हौले हौले
अखियां तरसें तेरे लिये
आजा साजन जल्दी से

बेजान सी बाहें
करें इतंज़ार तेरा
सूनी सेज सजा़ जा
जुलमी साजन आ जा


©Copyright Deeप्ती

No comments:

Post a Comment