Wednesday, May 10, 2017

सपने

जिंदगी की हसीन भोर 
खिलखिलाहटों में कब 
बीती कहां खबर

यूं हीं बीते आती
सांछ भी हमारी
मुसकराहटों तले

इक दूजे के सपने
अखियों में बसा
कर लें जीवन पार पथ।




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