Sunday, May 14, 2017

माँ

क्या शुभकामनाऐं दूं
सोचती बैठी में

क्या सिफ्र एक ही दिन तेरा
माँ तू तो हर रोज़ माँ है
तेरा प्रेम निछल है
हर फूल को समान रस है

तू यहाँ रहे न रहे
तेरा प्रेम अजर अमर है

यूं ही सदा मुसकराते रहना
अपने फूलों को संभाले रखना
अपने आंचल कि खुशबु से
सबका जीवन महकाए रखना।

-14/05/2017-



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