Friday, May 7, 2021

वो गलियां



जहां कभी बस्ता था बचपन
जहां खेलता था लड़कपन
छोड़ आए हम वो गलियां

जहां कभी गुजरती थी शाम सुहानी
जहां खेत खलियानों में पड़ता था पानी
छोड़ आए हम वो गलियां

जहां मासूमियत भरी शरारत थी
जहां स्वच्छंद खिलखिलाहट थी
छोड़ आए हम वो गलियां।

©Deeप्ती




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